चल चित्र: छोटी सी बात (१९७५)
स्वर: मुकेश
संगीत: सलील चौधरी
शब्द: योगेश गौड़
ये दिन क्या आए लगे फूल हंसने,
देखो बसंती बसंती होने लगे मेरे सपने,
ये दिन क्या आए लगे फूल हंसने।
सोने जैसी हो रही हैं हर सुबह मेरी,
लगे हर सांझ अब गुलाल से भरी,
चलने लगी महकी हुयी,
पवन मगन झूम के,
आँचल तेरा चूम के,
ये दिन क्या आए लगे फूल हंसने।
वहाँ मन बावरा आज उड़ चला,
जहाँ पर हैं गगन सलोना सांवला,
जाके वहीं रख दे कहीं,
मन रंगों में खोल के,
सपने ये अनमोल से,
ये दिन क्या आए लगे फूल हंसने,
देखो बसंती बसंती,
होने लगे मेरे सपने,
ये दिन क्या आए लगे फूल हंसने।
Saturday, December 20, 2008
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