चल-चित्र: रोग
स्वर: के के
संगीत: एम एम क्रीम
शब्द: नीलेश मिश्रा , सैयद कादरी
मैंने दिल से कहा ढूंढ लाना खुशी, नासमझ लाया गम तो ये गम ही सही।
बेचारा कहाँ जानता है, खलिश है या क्या खला है,
शहर भर की खुशी से, ये दर्द मेरा भला है,
जश्न ये रास न आए, मजा तो बस गम में आया है।
मैंने दिल से कहा ढूंढ लाना खुशी, नासमझ लाया गम तो ये गम ही सही।
कभी है इश्क का उजाला, कभी है मौत का अँधेरा
बताओ कौन भेस होगा, मैं जोगी बनूँ या लुटेरा,
कई चेहरे हैं इस दिल के न जाने कौन सा मेरा,
मैंने दिल से कहा ढूंढ लाना खुशी, नासमझ लाया गम तो ये गम ही सही।
हजारों ऐसे फासले थे जो तय करने चले थे,
राहें मगर चल पडी थी और पीछे हम रह गए थे,
कदम दो चार चल पाये किए फेरे तेरे मन के,
मैंने दिल से कहा ढूंढ लाना खुशी, नासमझ लाया गम तो ये गम ही सही।
खुला है इस रात में जो, बहकता नूर उसका,
कभी वो एक चेहरा बन के , अगर हो जाए अपना,
ये ही मेरी हकीकत है, मगर अब तक तो है एक सपना,
मैंने दिल से कहा ढूंढ लाना खुशी, नासमझ लाया गम तो ये गम ही सही।